Agarwal Child Surgical Care Center Haldwani : नवजात शिशु स्वस्थ रहे एवं उसका सही शारीरिक एवं मानसिक विकास कैसे होगा?

 


सभी माता-पिता की यही ख्वाहिश होती है कि
 उनका बच्चा स्वस्थ रहे एवं उसका शारीरिक एवं मानसिक विकास बराबर होता रहे। आधुनिक सुविधाओं एवं उपकरणों से सुसज्जित अस्पतालों के जरिए अब समय पूर्व जन्मे, कम वजन के एवं अन्य तकलीफों से नवजात को बचा तो लिया जाता है, लेकिन चिंता यह होती है कि कहीं इनका विकास अन्य बच्चों से पीछे तो नहीं चल रहा है। यदि समय रहते यह पता चल जाए तो उसका भी सफलतापूर्वक उपचार किया जा सकता है। जरूरत है ऐसे शिशु के माता-पिता को जागरूक एवं चौकन्ना रहने की।

वैसे तो सभी बच्चों के विकास का नियमित आकलन होना चाहिए, लेकिन यह निम्नलिखित शिशुओं के लिए ज्यादा जरूरी है :

1. समय से पूर्व एवं डेढ़ किलो से कम वजन के बच्चे।

2. बच्चे का जन्म के तुरंत बाद न रोना।

3. नवजात को झटके आना।

4. नवजात को पीलिया इतना अधिक होना कि उसके कारण खून बदलना पड़े।

5. शिशु को संक्रमण (इन्फेक्शन) होना।

6. जिस शिशु को वेन्टीलेटर पर रखा गया हो।

7. जन्मजात विकृति होना।


शिशु के सामान्य विकास की जानकारी :

1. शिशु की सामान्य वृद्धि एवं विकास की जानकारी माता-पिता को अपने बच्चे में किसी भी प्रकार की असामान्य स्थिति जल्दी ही भाँप लेने में सहायता करती है। ऐसी स्थिति में वे उचित समय पर चिकित्सा विशेषज्ञ की सलाह ले सकते हैं ताकि शिशु को हानि कम हो।

2. यह तथ्य कि एक बच्चा अन्य बच्चों के मुकाबले कोई क्रिया शीघ्र सीख लेता है, तो दूसरी अन्य क्रिया (एक्टीविटी) देर से सीखता है, बिना वजह की चिंता व परेशानी से दूर रखती है।

3. समय से पूर्व जन्म लेने वाले बच्चे का विकास स्वाभाविक रूप से उतना पीछे रहता है। उदाहरणतः यदि बच्चे का जन्म सात माह पर ही हो गया (सामान्यतः नौ माह पर होता है) तो इस बच्चे का विकास अन्य बच्चों से दो माह पीछे रहेगा, जो कि सामान्य है।

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